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Showing posts from February, 2020

आई चे अश्रु....!

        (मुंबई मधे एक वर्ष काम करून परत घरी जाऊन मुंबई ला परत येण्याचा योग)           मुंबई सोडल्यानंतर जवळपास नऊ महीने घरिच होतो, त्यात नेट चा अभ्यास तर एम फिल च्या प्रवेश पर...

दोस्ती के रंग कुछ ऐसे भी....!?

पता नही क्यो? पर सब अपना-अपना देखते है। बाकी कुछ भी हो, सब अपना ही सोंचते है। (शायद मुझे भी ऐसा ही जीना चाहिए।) हम किसी को कितना भी अच्छा दोस्त क्यो न माने, वो तो अपनी रंग से ही जीते...